नर्मदाप्रसाद मालवीय
08 मई 2005
हाइकु
खिला महका
और बिखर गया
प्यारा गुलाब ।
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नर्मदा प्रसाद मालवीय
posted by नर्मदा तीरे @
5:00 am
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